बल्ब का अविष्कार किसने किया? बल्ब का अविष्कार कब हुआ था?

      Hello दोस्तो hindikiinfo वेबसाइट पर आप सभी का स्वागत है। आशा करता हूं आप सब बढ़िया और तंदुरुस्त होंगे। दोस्तो हमारा आज का टॉपिक हैं बल्ब का अविष्कार इन हिंदी। 

बल्ब का अविष्कार इन हिंदी
बल्ब का अविष्कार इन हिंदी

           दोस्तो प्राचीन समय से इन्सान ने रोशनी के लिए कुछ ना कुछ किया हैं जैसे कि पहले समय में लोग आज जलते थे रोशनी ल लिए फीर बाद में दिए और मोमबत्ती का इस्तेमाल होने लगा। जब तक बल्ब का अविष्कार नहीं हुआ था तब तक लोग ऐसे ही आग को ही रोशनी के लिए इस्तेमाल करते थे। पर इस आग से बहुत सी दुर्घटना भी होती थी। पर बल्ब के अविष्कार के बाद ये चित्र बदल गया लोग घर के अलावा भी बल्ब का इस्तेमाल बाहर भी करने लगे। आज हम देखते हैं कि इस बल्ब का इस्तेमाल कहीं सारे दुकानों में, कंपनी, रास्तों पर  और भी विभिन्न जगह करने लगे जहा रोशनी कि जरुरत पड़ती हैं। तो आज हम इसी बल्ब के अविष्कार के बारे में जानेंगे। उम्मीद हैं आप इस पोस्ट को अंत तक जरूर पड़ेंगे। तो ज्यादा समय न गवाते हुए शुरू करते हैं आज का हमरा ये सफर। 

बल्ब क्या हैं ?

दोस्तो बल्ब के अविष्कार से पहले थोड़ा सा जान लेते हैं कि आखिर बल्ब क्या हैं। यह एक उपकरण हैं जिसे विद्युत् तार से जोड़ने के बाद  हमे रोशनी प्रदान करता हैं। सके लिए आपको विद्युत धारा कि आवश्यकता होगी, कहा भी आपको ये उपलब्ध हो वहा आप बल्ब लगा सकते हैं। बल्ब में टंगस्टन (Tungsten) धातु कि तार का इस्तेमाल किया जाता हैं जिससे उसको विद्युत धारा से जोड़ने पर वो धातु गरम हो कर रोशनी देता हैं। हाला कि अब इस दौर में इसके बहुत सारे प्रकार मौजूद हैं, पर पुराने जमाने में यही धातु बल्ब के लिए सर्वाधिक कारगर माना जाता था। 

बल्ब का अविष्कार इन हिंदी

 बल्ब का अविष्कार थॉमस एल्वा एडिसन जी ने 1879 में किया था।  इस अविष्कर से मानो दुनिया का चित्र ही बदल गया। थॉमस उस जमाने के जाने माने वैज्ञानिक थे। एडिसन जी को विश्व का पहला बल्ब बनाने के लिए पूरे डेढ़ साल का समय लगा था। पहली बार जब उन्होंने इस बल्ब को जलाया था तब वो बल्ब 13 घंटे तक जला था। उन्होंने उस वक्त कारबनिकृत धातु का इस्तेमाल उसमे किया था। कहा जाता हैं उन्होने उस समय में 6000 से ज्यादा संभवित मटेरियल पर परीक्षण किया था। इसके बाद उन्होंने कार्बन युक्त फिलामेंट का प्रयोग किया और वे इसमें सफल भी हो गये।  

            इसके अगले साल में उन्होंने मेनलो पार्क प्रयोगशाला में बहुत लोगो के भीड़ के सामने लैंप का इस्तेमाल किया। उसमे उन्होने कार्बोनेटेड कार्डबोर्ड उपयोग में लाया। इसका पेटेंट करने के कहीं महीनों बाद एडिसन और उनकी सहकर्यो को पता चला कि एक कार्बोनेटेड बांस फिलामेंट 1200 घंटे तक चल सकती हैं। इसके बाद उन्होंने अपने टीम के साथ मिल कर जापानी कार्बोनेटेड फिलामेंट का उपयोग करके व्यावसायिक लैंप का निर्माण शुरू कर दिया। बल्ब का अविष्कार इन हिंदी

          इलेक्ट्रिक लाइट्स किफायती, टिकाऊ, सुरक्षित और उपयोगी हो गई। घरघुती और व्यावसायिक तौर पर उन्हें लोगो ने बढ़ती संख्या में उपयोग करना शुरू कर दिया।

         दोस्तो आज आपने बल्ब का अविष्कार किसने किया इन हिंदी कि जानकारी के बारे में देखा। आशा करता हूं आप सबने ये पोस्ट अंत तक जरूर पढ़ी होगी और अच्छी भी लगी होगी। अगर कुछ नया सीखने को मिला हो तो इसे शेयर करे अपने सम्बंधित लोगो के साथ। धन्यवाद आपका मूल्यवान समय इस पोस्ट को देने के लिए। इसी तरह कि और पोस्ट के लिए जुड़े रहिए hindikiinfo वेबसाइट पर।

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