मोबाइल का अविष्कार किसने किया ? मोबाइल का अविष्कार कब हुआ ? भारत में मोबाइल कब आया ? 

    Hello दोस्तो hindikiinfo वेबसाइट पर आप सभी का स्वागत है। आशा करता हूं आप सब बढ़िया और तंदुरुस्त होंगे। दोस्तो हमारा आज का टॉपिक हैं मोबाइल का अविष्कार किसने किया ? 

मोबाइल का अविष्कार किसने किया
मोबाइल का अविष्कार किसने किया

          दोस्तो आज के जमाने में मोबाइल के बिना कुछ भी काम नहीं होता ये बात तो आप सभी जानते हैं। मोबाइल के बिना हमारी ज़िन्दगी हम सोच भी नहीं सकते, क्यूंकि हमने सभी ने अपने अपने मोबाइल के अंदर एक अपना अलग विश्व जो बनाया हैं। और ये विश्व हमरा खुद का बनाया हुआ हैं तो लाजमी हैं ये हमे सबसे ज्यादा पसंद भी आयेगा। मोबाइल ने ना सिर्फ दूर बैठे हुए लोगो के साथ संचार का काम किया बल्कि टेक्नोलॉजी कि इस दुनिया में इंसानों के लिए और भी रास्ते खुल कर के हमारी ज़िन्दगी आसान बना दी। 

आज के दौर में इन्सान मोबाइल पर बात करने के अलावा मोबाइल से फोटोज क्लिक करने, गाने सुनना, सोशल मीडिया पर काम करना या फिर मनोरंजन के तौर पर करता हैं। सुबह आंख खोलने के बाद और रात में आंखें बंद करने से पहले लोग अपना अधिकांश समय मोबाइल पर ही बिताते हैं। मोबाइल हमारी ज़िन्दगी का एक अटूट हिस्सा बन गया हैं इसके बिना एक दिन भी गुजरना मुश्किल होता जा रहा हैं। ऐसे में आपके मन में एक सवाल तो आता है के ऐसे कमाल के यंत्र यानी मोबाइल का अविष्कार किसने किया और कब ? 

 

मोबाइल का अविष्कार किसने किया

        मोबाइल का अविष्कार मार्टिन कूपर (Martin cooper) ने 3 अप्रैल 1973 में किया था। मार्टिन उस समय मोटोरोला कंपनी में शोधकर्ता और कार्यकर्ता थे। तो बेशक ही दुनिया का पहला मोबाइल बनाने वाली कंपनी बनी मोटोरोला।

          मार्टिन कूपर द्वारा निर्मित इस मोबाइल फोन का नाम था Motorola DynaTAC रखा था। दुनिया का पहला मोबाइल फोन कहलाने वाला मोबाइल इस समय में लगभग एक ईंट के बराबर का था। इस मोबाइल कि लम्बाई 9 इंच (22.9 cm) थी, और ये वजन में 1.1 किलोग्राम का था। इस फोन का नेटवर्क सेलुलर नेटवर्क था जिस पर ये काम करता था। 30 मिनट कि बातों के लिए इस मोबाइल को लगभग 10 घंटे तक चार्ज करना पड़ता था। उस समय दुनिया का पहला फोन होने कि वजह से इसकी लागत भी बहुत थी। इस फोन में भी कुछ खामियां थी जिसकी वजह से एक दशक तक इसकी खामियां मिटाने कि और इसके उत्पादन पर काम किया गया था। इसी बीच मोबाइल के नेटवर्क को भी सुधरित और बेहतर बनाया गया। उसके बाद ही सन् 1983 में मोबाइल फोन्स को बाजारों में लाया गया। बाजारों में जो फोन आया उसका नाम Motorola DynaTAC 8000X  रखा गया।

          सन् 1983 में आए हुए उस मोबाइल फोन कि कीमत उस समय 3995 डॉलर्स इतनी थी। आज के वो लगभग 2.80 लाख रुपए होते हैं।  जैसे कि बताया था पहले वाले फोन से ये बेहतर बनाया गया था, इसकी बैटरी 6 घंटे तक टिक सकती थी, इसको पूरा चार्ज करने के बाद 30 मिनट तक बात हो सकती थी, और तो और इसमें 30 लोगों के नंबर्स हमे सेव करने कि भी सुविधा दिलाई गई थी। 

 

भारत में मोबाइल कब आया ? 

         सन् 1983 में तो बाजार में फोन्स आ गए थे पर ये सिर्फ अमेरिका के बाज़ार तक ही थे। भारत कि बात करे तो भारत में मोबाइल सर्विस 1995 में शुरू कि गई थी। उस समय के भारत के केंद्रीय दूरसंचार मंत्री थे श्री सुख राम जी उन्होंने 31 जुलाई 1995 को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री श्री ज्योति बासु से सर्वप्रथम मोबाइल से बात करी थी। उस समय का यह भारत में हुआ सर्वप्रथम कॉल दिल्ली के संचार भवन से कलकत्ता कि राइटर्स बिल्डिंग पर जुड़ा था। इसी मोबाइल कॉल के बाद भारत में मोबाइल सेवा संचालन शुरू हुआ था। 

           भारत में उपलब्ध इसी प्रथम मोबाइल सेवा को Modi Telstra’s MobileNet के जरिए उपलब्ध किया गया था। मोदी टेल्स्ट्रा एक कंपनी थी जो मोदी समूह और आस्ट्रेलियाई टेलीकॉम कंपनी टेल्स्ट्रा का संयुक्त उद्यम था। टेल्स्ट्रा कंपनी इस समय कि सेल्यूलर सेवाएं प्रदान करने वाली अनुज्ञापत्र प्राप्त आठ कंपनियों में से एक थी। 

           आज के समय कि बात कि जाए तो आज मोबाइल फोन्स वापरकर्ता का सटीक आंकड़ा बता पाना मुश्किल हैं। दिन प्रति दिन मोबाइल के वापरकर्ते बढ़ रहे हैं। भारत कि बात करे भारत दूरसंचार नेटवर्क, मोबाइल वापकर्ता में भारत पूरे विश्व में दूसरे स्थान पर आता हैं। भारत उन देशों में भी शामिल हैं जिनके काम दर में कॉल रेट्स हैं। 

   

          दोस्तो आज आपने मोबाइल का अविष्कार किसने किया इन हिंदी कि जानकारी के बारे में देखा। आशा करता हूं आप सबने ये पोस्ट अंत तक जरूर पढ़ी होगी और अच्छी भी लगी होगी। अगर कुछ नया सीखने को मिला हो तो इसे शेयर करे अपने सम्बंधित लोगो के साथ। धन्यवाद आपका मूल्यवान समय इस पोस्ट को देने के लिए। इसी तरह कि और पोस्ट के लिए जुड़े रहिए hindikiinfo वेबसाइट पर।

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